पाई, संजय ढुल
प्रदेश सरकार के द्वारा तीन बार घोषित आर्दश गांव पाई में बिना बरसात के भी बाढ़ के हालत बने हुये है। इन हालतों के बाद ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना बढ़ रहा है।

ग्रामीण अनिल ढुल, महावीर ढुल, डी सी ढुल, संजय ढुल, राजेश, नरेश आदि ने बताया कि पाई में कई वर्षों सेे गंदे पानी की समस्या बनी हुई है। परेशानी को देखते हुये सरकार द्वारा गांव में सीवरेज भी ड़ाले हुये है, परन्तु वे भी किसी काम नही आये। उन्होंने बताया कि गांव में लगभग 50 एकड़ में फैला आबू तालाब, जिसको दाब वाला तालाब भी कहते है, हमेशा गंदे पानी से लबालब रहता है। इस तालाब से निकासी के लिये लगभग साढ़े तीन करोड़ तथा पाऊंडिंग सिस्टम के लिये लगभग 8 करोड़ की ग्रोट मंजुर हुई थी और टेंडर भी जारी हो गये थे। इतना ही नही कार्य भी पिछले वर्ष शरू हो गया था। इस तालाब से गंदे पानी की निकासी सोंगल ड्रेन में होना था। इसके लिये जमीन की खुदाई भी शुरू हो गई थी और लगभग दो एकड़ में पाईप लाईन भी दब गई थी। चलते कार्य पर किसी कारण वंश रोक लग गई और आज स्थिति बाढ़ की बन गई है। गांव व आसपास फैले इस गंदे पानी के सडऩे से बिमारियां फैलने का उऱ बन गया है। तालाब का पान खेतों में जाने से कई किसान अपनी फसल लगाने से वंचित रह गये। इतना ही नही गांव के अंदर जहां पर यह गंदा पानी फैला है दो तीन मंदिर जैसे माता काली मंदिर, उचाना वाला माता मंदिर आदि आते है और पास ही सरस्वती स्कूल भी है। गांव की महिलायें पूजा करने इन मंदिरों में जाने से लाचार है और छोटे- छोटे बच्चों को स्कूल में इस गंदे पानी से गुजर कर जाना पड़ता है।

भाजपा नेता के द्वारा काम रोकने से अटका हुआ है कार्य।
इस बारे में जब सरपंच प्रतिनिधि नरेश ढुल तथा सरपंच राजबाला से जाना गया तो उन्होंने बताया कि पानी की निकासी के लिये लगभग साढ़े तीन करोड़ व तालाब की पाऊडिंग के लिये लगभग पांच करोड़ की गंाट आई हुई है और पिछले वर्ष असके लिये टेंडर भी हुये और कार्य भी शुरू हो गया था, कि अचानक जिले के एक भाजपा नेता के द्वारा इस कार्य को रुकवा दिया था। कार्य अब अधुरा है और इसको अब मई 2025 में दुबारा से शुरू किया जायेगा। गांव में बाढ़ जैसे हालत से ग्रामीण परेशान है। गलियों में खड़े गंदे पानी की समस्या से वे गांव की गलियां भी नही बना सकते।